मुख्यमंत्री की जींद रैली में महिलाओं की उपस्थिति बनी चर्चा का विषय
रैली के दो दिन बाद भी संतरी चुनरिया को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी

सत्य खबर हरियाणा
CM Railly in Jind : जींद को हरियाणा की राजनीतिक राजधानी कहा जाता है। राजा जयंत की इस नगरी से राजनीतिक दल सत्ता हासिल करने का आशीर्वाद लेने का काम करते हैं। रैलियों के गढ़ जींद में यूं तो रैलियां होती रहती हैं, लेकिन दो-तीन पहले जींद में हुई रैली ने एक मायने में सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।
रैलियों में भीड़ अक्सर पुरुषों की नजर आती है, लेकिन दो दिन पहले मुख्यमंत्री की धन्यवाद एवं विकास रैली में जिस प्रकार से महिलाओं की भीड़ उमड़ी वह अपने आप में कमाल था। राजनीतिक पंडित मानते हैं कि इस रैली में आई भीड़ में आधे से ज्यादा महिलाएं थीं। माना जाता है कि दो तिहाई महिलाएं और एक तिहाई पुरुषों की भीड़ थी।
अगर जींद की रैलियों में महिलाओं की भीड़ की बात की जाए तो जींद की रैलियों में महिलाओं की सबसे ज्यादा भीड़ 1986 की ताऊ देवीलाल की न्याय युद्ध रैली में थी। दूसरे नंबर पर 1995 में बंसीलाल की प्रदेश स्तरीय चुनावी रैली में थी, जिसके बाद शराबबंदी के नारे ने जोर पकड़ा और 1996 में बंसीलाल सत्ता में आए। यह दोनों रैलियां प्रदेश स्तर की थी। हरियाणा सरकार के तीज महोत्सव कार्यक्रम में भी महिलाओं की अच्छी खासी भीड़ थी लेकिन वह कार्यक्रम भी प्रदेश स्तर का था।
असल में प्रदेश में राजनीतिक रैलियों में भीड़ जुटाने का मुख्य काम पुरुष करते आए हैं, लेकिन जींद के विधायक और हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर डॉक्टर कृष्ण मिढ़ा द्वारा आयोजित मुख्यमंत्री की धन्यवाद एवं विकास रैली में जिस प्रकार से महिलाओं की भीड़ उमड़ी वह अपने आप में बड़ी बात थी। अधिकांश महिलाएं संतरी कलर की चुनरी ओढ़े हुए थी। महिलाओं का उत्साह भी रैली में जबरदस्त तरीके से देखने को मिल रहा था। महिलाओं ने नए केवल रैली में भाग लिया बल्कि जिस गर्मजोशी के साथ उन्होंने नारे लगाए और सरकार की नीतियों का समर्थन किया वह इस बात का प्रमाण था कि महिलाओं की भीड़ न तो भाड़े पर लाई गई थी और न ही उन्हें बहकाकर लाया गया था। महिलाओं में उत्साह उस समय और भी ज्यादा था जब जींद के विधायक और हरियाणा विधानसभा के उपाध्यक्ष डॉ कृष्ण मिढ़ा बोल रहे थे।
रैली के पंडाल को दो हिस्सों में बांटा गया था एक हिस्से में महिलाओं को बैठाया गया था जबकि दूसरे हिस्से में पुरुषों के बैठने की व्यवस्था थी। आलम यह था कि महिलाओं वाले हिस्से के भरने के बाद भी महिलाओं की जब भीड़ बची रही तो उन्हें रैली के लिए बनाए गए ‘डी’ स्थल पर बैठाने की व्यवस्था की गई। इसके बाद भी महिलाओं की भीड़ कम नहीं हुई। रैली में जितनी चर्चा मुख्यमंत्री की घोषणा की थी उतनी ही चर्चा जींद विधायक के कटाक्षों और महिलाओं की संतरी चुनरिया की भी थी।
रैली के दो दिन बाद भी राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि जींद के विधायक ने रैली में महिलाओं की बड़ी भीड़ जुटाकर जींद की राजनीति को एक नई दिशा देने का काम किया है।
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